श्री गणेश जी
🚩 बुधवार विशेष

श्री गणेश जी की आरती

"जय गणेश जय गणेश देवा"

लिपि / Script:
भावार्थ (Meaning):
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॥ पद 1 ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

💡 भावार्थ (Meaning):

भगवान गणेश जी की जय हो। आपकी माता साक्षात देवी पार्वती हैं और आपके पिता भगवान महादेव (शिव) हैं।

॥ पद 2 ॥

एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

💡 भावार्थ (Meaning):

एक दंत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले प्रभु के मस्तक पर सिन्दूर सुशोभित है और वे मूषक (मूसे) पर सवार हैं।

॥ पद 3 ॥

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

💡 भावार्थ (Meaning):

पूजा में पान, सुगंधित फूल, मेवे और मोदक/लड्डू अर्पित किए जाते हैं। सभी संत-भक्त श्रद्धापूर्वक आपकी सेवा करते हैं।

॥ पद 4 ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

💡 भावार्थ (Meaning):

आप नेत्रहीन को दृष्टि, कोढ़ी को निरोगी काया, पुत्रहीन को संतान और निर्धन को धन-समृद्धि प्रदान करते हैं।

॥ पद 5 ॥

सूरश्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

💡 भावार्थ (Meaning):

हम भक्त आपकी शरण में आए हैं, हमारी भक्ति और सेवा को सफल करें। हे गणेश देवा, आपकी सदैव जय हो!

🪔

॥ इति श्री गणेश जी आरती संपूर्णम् ॥

॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

🙏 श्री गणेश जी की पूजा विधि एवं नियम:

आरती करते समय दूर्वा घास, मोदक और लाल पुष्प अर्पण करें। 3 बार गोल घूमकर परिक्रमा करें।